रविवार, 28 मार्च 2010

बलात्कार.........बलात्कार..............बलात्कार


भोपाल में पाँच साल की बच्ची के साथ बलात्कार और फिर उसका कत्ल। दिन पर दिन बढ़ती जा रही इस दरिंदगी पर समाज के प्रबुद्ध वर्ग को तुरंत आगे आकर इसके विरुद्ध कोई ठोस कदम उठाना चाहिए। ब्लॉग जगत, पत्र-पत्रिकाओं, मीड़िया, और विभिन्न सामाजिक मंचों को अपने अपने स्तर पर और सामूहिक रूप से इस मसले पर गहन विचार विमर्श कर स्वयं भी जनचेतना जागृत करने के लिए सड़क पर आना चाहिए और सरकार,प्रशासन और विभिन्न सामाजिक संस्थानों को भी इस मामले पर परिणामकारक कार्यवाही करने, समाज में नैतिकता के स्तर को ऊँचा उठाने के लिए आवश्यक योजना तैयार करने के लिए मजबूर करना चाहिए।


इसी मसले पर नवम्बर में दृष्टिकोण में जारी एक लेख का लिंक नीचे दिया जा रहा है कृपया इसे अवश्य पढ़े/पढ़ाएँ और अपने बहुमूल्य सुझाव भी अंकित करें।
 
नैतिक पतन और कला -संस्कृति-साहित्य की जिम्मेदारियाँ

1 टिप्पणी:

  1. आतंकवादियों और बलात्कारियों में कोई फर्क नहीं है अपना काम करते समय दोनों का मानसिक स्टेट एक ही होता है। दोनों ही समाज के शत्रु हैं इन्हें बीच चौराहे पर खड़ा कर गोली से उड़ा देना चाहिए।
    नारदमुनि

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