बुधवार, 2 मार्च 2011

क्या लिंग पूजन भारतीय संस्कृति है ?

           आज 'शिवरात्री' है। एक ऐसे भगवान की पूजा आराधना का दिन जिसे आदि शक्ति माना जाता है, जिसकी तीन आँखें हैं और जब वह मध्य कपाल में स्थित अपनी तीसरी आँख खोलता है तो दुनिया में प्रलय आ जाता है। इस भगवान का रूप बड़ा विचित्र है। शरीर पर मसान की भस्म, गले में सर्पों का हार, कंठ में विष, जटा में गंगा नदी तथा माथे में प्रलयंकर ज्वाला है। बैल को उन्होंने अपना वाहन बना रखा है।
          भारत में तैतीस करोड़ देवी देवता हैं, मगर यह देव अनोखा है। सभी देवताओं का मस्तक पूजा जाता है, चरण पूजे जाते हैं, परन्तु इस देवता का 'लिंग' पूजा जाता है। बच्चेबूढ़ेनौजवान, स्त्रीपुरुष, सभी बिना किसी शर्म लिहाज़ के , योनी एवं लिंग की एक अत्यंत गुप्त गतिविधि को याद दिलाते इस मूर्तिशिल्प को पूरी श्रद्धा से पूजते हैं और उपवास भी रखते हैं।
          यह भगवान जिसकी बारात में भूतप्रेतपिशाचों जैसी काल्पनिक शक्तियाँ शामिल होती हैं, एक ऐसा शक्तिशाली देवता जो अपनी अर्धांगिनी के साथ एक हज़ार वर्षों तक संभोग करता है और जिसके वीर्य स्खलन से हिमालय पर्वत का निर्माण हो जाता है। एक ऐसा भगवान जो चढ़ावे में भाँगधतूरा पसंद करता है और विष पीकर नीलकण्ठ कहलाता है। ओफ्फोऔर भी न जाने क्याक्या विचित्र बातें इस भगवान के बारे में प्रचलित हैं जिन्हें सुनजानकर भी हमारे देश के लोग पूरी श्रद्धा से इस तथाकथित शक्ति की उपासना में लगे रहते है।
          हमारी पुरा कथाओं में इस तरह के बहुत से अदृभुत चरित्र और उनसे संबधित अदृभुत कहानियाँ है जिन्हें पढ़कर हमारे पुरखों की कल्पना शक्ति पर आश्चर्य होता है। सारी दुनिया ही में एक समय विशेष में ऐसी फेंटेसियाँ लिखी गईं जिनमें वैज्ञानिक तथ्यों से परे कल्पनातीत पात्रों, घटनाओं के साथ रोचक कथाओं का तानाबाना बुना गया है। सभी देशों में लोग सामंती युग की इन कथाओं को सुनसुनकर ही बड़े हुए हैं जो वैज्ञानिक चिंतन के अभाव में बेसिर पैर की मगर रोचक हैं। परन्तु, कथाकहानियों के पात्रों को जिस तरह से हमारे देश में देवत्व प्रदान किया गया है, अतीत के कल्पना संसार को ईश्वर की माया के रूप में अपना अंधविश्वास बनाया गया है, वैसा दुनिया के दूसरे किसी देश में नहीं देखा जाता। अंधविश्वास किसी न किसी रूप में हर देश में मौजूद है मगर भारत में जिस तरह से विज्ञान को ताक पर रखकर अंधविश्वासों को पारायण, जपतप, व्रतत्योहारों के रूप में किया जाता है यह बेहद दयनीय और क्षोभनीय है।
          देश की आज़ादी के समय गाँधी के तथाकथित 'सत्य' का ध्यान इस तरफ बिल्कुल नहीं गया। नेहरू से लेकर देश की प्रत्येक सरकार ने विज्ञान के प्रचार-प्रसार, शिक्षा और भारतीय जनमानस के बौद्धिक विकास में किस भयानक स्तर की लापरवाही बरती है, वह इन सब कर्मकांडों में जनमानस की, दिमाग ताक पर रखकर की जा रही गंभीरतापूर्ण भागीदारी से पता चलता है। आम जनसाधारण ही नहीं पढ़े लिखे शिक्षित दीक्षित लोग भी जिस तरह से आँख मूँदकर 'शिवलिंग' को भगवान मानकर उसकी आराधना में लीन दिखाई देते हैं, वह सब देखकर इस देश की हालत पर बहुत तरस आता है।
          यह भारतीय संस्कृति है! अंधविश्वासों का पारायण भारतीय संस्कृति है ! वे तथाकथित शक्तियाँ, जिन्होंने तथाकथित रूप से विश्व रचा, जो वस्तुगत रूप से अस्तित्व में ही नहीं हैं, उनकी पूजा-उपासना भारतीय संस्कृति है! जो लिंग 'मूत्रोत्तसर्जन' अथवा 'कामवासना' एवं 'संतानोत्पत्ति' के अलावा किसी काम का नही, उसकी आराधना, पूजन, नमन भारतीय संस्कृति है?
          चिंता का विषय है !! कब भारतीय जनमानस सही वैज्ञानिक चिंतन दृष्टि सम्पन्न होगा !! कब वह सृष्टी में अपने अस्तित्व के सही कारण जान पाएगा!! कब वह इस सृष्टि से काल्पनिक शक्तियों को पदच्यूत कर अपनी वास्तविक शक्ति से संवार पाएगा ?

18 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (2-3-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  2. आपके जैसा आदमी बिल्ली का गू इसीलिए तो कहलाता है कि वो न तो लीपने के काम आता है न पोतने के। आपके साइंस की जहाँ पहुंच कर गाँड़ फ़ट जाती है ना, शिव का दर्शन वहाँ से शुरू होता है। जरूर आपकी अम्मा की चूत भोसड़ा रही होगी जो उसने आप जैसा बेवकूफ़ लंड का बाल पैदा किया जो जाने समझे बिना ही मुँह चलाता रहता है। बैड बाय।

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  3. कठिनाई यह है कि भारतीय समाज को अनपढ़ता के गर्त में धकेल कर ये पौराणिक कथाएँ जन-जन को परोसी गई हैं. जो विवेकशील सोच बौध धर्म में उपलब्ध थी उसे क्रमिक तरीके से नष्ट किया गया. आपके जैसी सोच वाले युवा अब सक्रिय हैं. इससे लाभ होगा.

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    1. manniya mahoday shree bhushan ji

      kya aap ke pitaji britisher they jara apne pita ji se confirm karey yedi wah jivit hay to kyu ki aap britishro ki bhasa bol rahey ho

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति|
    महाशिवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएँ|

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  5. भूषन जी , क्या आपको बौद्ध धर्म के बारे में जानकारी है ? बौद्ध धर्म हिन्दू-धर्म की ही एक शाखा है..जो आप जैसे ग्यानी किन्तु वैदिक-सनातन धर्म को न समझने वाले व्यक्ति ने एक नये पन्थ की भांति प्रारम्भ किया..परन्तु कालान्तर में भारत से ही समाप्त होगया...क्योंकि व्यवहारिक मानव जीवन के लिये बौद्ध धर्म की कुछ भी उपलब्धि नहीं थी...
    ---इस प्रकार के अग्यनान्धकार से पूर्ण व मूर्खतापूर्ण आलेख , बेनामी जैसे लोगों को संसदीय भाषा प्रयोग के लिये उकसाते हैं...

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  6. GIYN KI DRITI SE YE BAT THIK HAI PRNTU PURN NHIN HAI KYONKI SAKAR KE BGER NIRAKAR KA GYAN NHIN HO SKTA BHOTIK DRITI SE BHI YE BAT GLT HAI KYONKI LOG PRMATMA KO IKSI BHI ROOP MAIN SHI MANTE TO HAN VO NASTIK NHIN HAN FIR ANEK PORANIK KTHON MAIN SIVLING KA JIKR HAI AAP USE MATR EK LING NHI KHE SKTE ANEKO POORATN MANDIR UNKE NAM KE HAN KYON BINA KARN AAP EK BILDING KHDI KRKE DIKHAO FIR ITNE POORANE SIVLING MANDIR KYON KHAN SE AA GYE KOI TO KARN RHA HOGA MANA AAP NE NHIN DEKHA KISI NE TO KUCH DEKHA HOGA

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  7. bhayee bhooshan jee avam lekhk jee hum dono se sahmat nahee hoo . kyo kee yad ling ya yoni na hotee to aap dono bhee na hote our aap ka ye gyan astitwa me na hi aata ,ab aap samjh gaye hoge jo aap jaisa gyanee beer mahan paida karta hai vah ling & yoni hee hai ab to aap ko bharteey darsan ka pata chal he gya hoga /es ke alava ab tak jo bhee aaya hai esse hee aaya hai isliye ye MAHADEV hai kahne ko to abhee bahut hay kintu abhee itna hee khooga pahle padho samjho phir likho ||L.K. Mishra

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  8. he mere priya bandhuo . aap logoke vichar jankar muje hairani hoti hai . mere vichar se jabtak hame kisi vastu ya visay ke bareme purn rup se gyan naho tabtak us visay ke uplaksh me ham bahesh karna vyarth hai ... to tatpary hahi hai ke mere priya bandhavo ke pahle aap shiv tatv ko purn upse jano ..
    mera visvas hai jab aap shiv tatv ko yatharth janenge to phir duniya ka koi saval aap ko nahi satayega ,,
    eti astu ...siv tatv ko samajneme siv apki sahayta kare ...subham bhavatu .....

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  9. main Dr. shyam gupta ji se kahna chahunga ki Bauddh dharm hindu dharm ki shakha nahi hai. ye bilkul alag hai.
    bauddh dharm me 33 crore devi devta nahin hain... yahaan to koi bhi devta nahi. Gautam buddh bhi nahi... kripya achchi tarah se bauddh dharm ke baare me padhen fir bolen..

    Gautam buddh ne kabhi koi dharm nahi banaya.
    unki shikshaon ko logo ne dharm maan liya...

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  10. अनवर मिया आपको यदि ज्ञान नहीं हो तो किसी विषय के बारे में नहीं बोलना चाहिए ये सनातन परम्परा है. पर आप तो बोले ही जा रहे है और न सिर्फ बोले जा रहे है बल्कि कपडे खोले जा रहे है. आखिर आपने जो लिंक पर जानकारी दी है वो आपने छोटी छोटी टुकड़े में कही है. आपको तो पता ही नहीं की क्या तो शिव है और क्या शक्ति फिर आपको क्या पता की लिंग की पूजा क्यों होती है.
    सुनो मिया जिन पुरानो की तुम बाते कर रहे हो उनको तो तुम्हारे बाप दादाओं ने वर्षो पहले जला दिया था. सुना नहीं तुमने की नालंदा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय की आग ६ महीनो तक नहीं बुझी थी. ये आग तुम तुर्कों ने ही लगे थी इसलिए हरी हुई कोम के पुरानो पर टिपण्णी करने वाले तुम मलेछ की ओलाद को मई बताता हूँ की लिंग की उत्पति ब्रम्हा और विष्णु के मध्य हुए युद्ध को रोकने के लिए हुई थी. और जो सोमनाथ का लिंग तुम्हारे बाप गजनी ने तोडा था वहीँ पर था वो दैवी लिंग. अब तुम कहोगे की फिर वो टुटा कैसे तो मिस्टर ये तो तुम्हे भी पता ही होगा की कलियुग में उस स्थान से शिव ने अपना देवत्व वापस ले लिया था और काशी में आ गए थे. खैर भला इसी में है की तुम अपनी गलती मान लो और माफ़ी मांग लो वरना फिर पछताना पड़ेगा तुम्हे. साले हरामी कोई तेरे मोहमद को गली निकाले तब लेकिन ये मेरा भारत है यहाँ पर कुते के भोंकने पर उसका मुह तिरो से बंद किया जाता है उसे मारा नहीं जाता.

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  11. Bhartiya Sanskrati mai Shadi ke bad shuhagrat ki rat ko dulhe ke Ling aur dulhin ki yoni ki pooja Apne kulkhandan mai honhar BaChho ke janm ke leys karai jati to Phir Bhagwan Shiv ki ling ko poojne mai Kya Galat he new Genration Healthy & Butiful ho bus sab yahi chahte he |

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  12. अंधविश्वास और आस्था में अंतर होता है मूर्ख, आत्मा शुद्ध करके सोचो भगवान् अवस्य दिखेंगे| मै आपके हर प्रश्न का जवाब दे सकता हूँ पर पहले
    अनुरोध है आपसे की आप अपने इस पोस्ट के लिखने की पीछे की अपनी मंशा जाहिर कीजिये, अगर आप हमें ये कहना चाहते की आप हिन्दुस्तान के शुभेक्षिक है और इसे विज्ञान की ओर ले जाना चाहते है तो मै आपको सुझाव देता हूँ की आप ब्लॉग पे बकवास न करके गाँव गाँव जाइए और वहां जाकर बच्चो को विज्ञानं की शिक्षा दीजिये पर हिंदुस्तान में रहकर हिन्दुओ के आराध्य पे सवाल उठाने का जुर्रत नहीं करिए..

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  13. हिंदू धर्म में त्रिदेवों का सर्वाधिक महत्व बताया गया है ब्रह्मा, विष्णु व महेश। इनमें से सिर्फ भगवान शिव ही ऐसे हैं जिनकी लिंग रूप में भी पूजा की जाती है। ऐसा क्यों? इस प्रश्न का उत्तर शिवमहापुराण में विस्तृत रूप से दिया गया है, जो इस प्रकार है-
    शिवमहापुराण के अनुसार एकमात्र भगवान शिव ही ब्रह्मरूप होने के कारण निष्कल (निराकार) कहे गए हैं। रूपवान होने के कारण उन्हें सकल(साकार) भी कहा गया है। इसलिए शिव सकल व निष्कल दोनों हैं। उनकी पूजा का आधारभूत लिंग भी निराकार ही है अर्थात शिवलिंग शिव के निराकार स्वरूप का प्रतीक है। इसी तरह शिव के सकल या साकार होने के कारण उनकी पूजा का आधारभूत विग्रह साकार प्राप्त होता है अर्थात शिव का साकार विग्रह उनके साकार स्वरूप का प्रतीक होता है।
    सकल और अकल(समस्त अंग-आकार सहित साकार और अंग-आकार से सर्वथा रहित निराकार) रूप होने से ही वे ब्रह्म शब्द कहे जाने वाले परमात्मा हैं। यही कारण है सिर्फ शिव एकमात्र ऐसे देवता हैं जिनका पूजन निराकार(लिंग) तथा साकार(मूर्ति) दोनों रूप में किया जाता है। भगवान शिव ब्रह्मस्वरूप और निष्कल(निराकार) हैं इसलिए उन्हीं की पूजा में निष्कल लिंग का उपयोग होता है।

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  14. sun o miye hamare dharm par mat bol aur science se agar tujey jodna hai to apne dharm ko jod teri kuran ko jod aur jis dharm ke bare main pata nahi ho to bola mat kar aur tera dharm kurbani aur gou hattya kyo karte hai resion bata jab thumhare mohamad ne ek bar kurbani kar di phir roz roz kyo karte ho sintific resion bat chal

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  15. Kisi v baat ko bina samjhe nahi bolna chahiye, aap aesa mante hai to mahadev ki taraha bis(विस) pikar dikhye
    unki barabari karneki aapko koi haq nahi hai.

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