शनिवार, 23 जनवरी 2010

मैं सुभाषचन्द्र बोस बोल रहा हूँ...............

सुभाषचन्द्र बोस उवाच- सुभाषचन्द्र बोस जयन्ती 23 जनवरी पर...............



‘‘मैं अपने बचपन में अंग्रेज़ों को देश से भगाना ही सबसे बड़ा कर्तव्य समझता था। बाद में गंभीर चिंतन के बाद इस नतीजे पर पहुचा कि सिर्फ अंग्रेज़ों को भगाने से ही मेरा फर्ज़ पूरा नहीं होगा। भारत वर्ष में एक नई सामाजिक व्यवस्था लागू करने के लिए एक और क्रांति की आवश्यकता है।’’
‘‘जो महान आदर्श को नहीं चाहता वह कभी इन्सान नहीं बन सकता।’’

‘‘यदि हम एक विचार अपनाते हैं तो हमें पूर्णतः अपने-आप को उसको समर्पित करना पड़ेगा और वह हमारे जीवन को परिवर्तित करेगा। एक अंधेरे कमरे में रोशनी आने से उसका अंधेरा पूरी तरह दूर हो जाएगा।’’


‘‘जो व्यक्ति अत्याचार होते देखकर भी उसे दूर करने की कोशिश नही करता वह इन्सानियत को बेइज़्ज़त करता है।’’

‘‘भूलो मत मनुष्य के लिए अन्याय और झूठ के साथ समझौता करना जघन्यतम अपराध है।’’

‘‘धर्म के नाम पर, देश के नाम पर, राजनीति के नाम पर किसी प्रकार की कट्टरता-अन्धता आदि हमारे शिक्षा के मंदिरों में प्रवेश न कर सके, इस ओर हमें नज़र रखनी चाहिए।’’




‘‘हिन्दु और मुसलमानों के हित परस्पर विरोधी हैं, यह बात जो कहते हैं वे सच्ची बात नहीं कहते हैं। भारतवर्ष की मूल समस्याएँ क्या हैं ? खाद्य का अभाव, बेराजगारी, राष्ट्रीय उद्योग का ह्नास, मृत्युदर में वृद्धि, स्वास्थ्यहीनता, शिक्षा की कमी - से ही मूल समस्याएँ हैं। इन समस्याओं का समाधान न होने से जीवन दूभर हो उठा है, जिन्दा रहना भी बेमानी हो गया है और इन सारे मामलों में हिन्दु और मुसलमानों के हित अभिन्न हैं।’’

‘‘आज़ादी से मेरा तात्पर्य मात्र राजनैतिक बन्धनों से मुक्ति नहीं है। वरन् इसका तात्पर्य है धन का समान बंटवारा जातिगत अवरोधों और सामाजिक विषमताओं का खात्मा, साम्प्रदायिक और धर्मान्धता का विनाश।’’

सुभाषचन्द्र बोस

4 टिप्‍पणियां:

  1. नेता जी का दृष्टिकोण बहुत व्यापक था. बिस्मिल, भगत सिंह और अशफाक उल्ला इत्यादि हमारे अमर शहीदों ने बहुत बढिया स्वप्न देखे थे जो उनके जीवित रहते पर ही फलीभूत हो सकते थे. यहीं पर देश का दुर्भाग्य प्रारम्भ हो गया कि जिन्हें जीवित रहना चाहिये था, वह सूली पर चढ़ गये या चढ़वा दिये गये.

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  2. सुभाषचन्द्र बोस की वैचारिकी का स्प्ष्ट चित्र खींचती यह उक्तियां।
    आपने जाहिर है समुचित दृष्टि के साथ यह श्रम किया है।

    शुक्रिया।

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  3. दृष्टिकोण जी, आपने मेरे ब्लॉग पर टिप्पड़ी की. इसके लिए धन्यवाद. मैं समझता हूँ की मेरे ब्लॉग पर बहुत सी दलीलें है जो शहीद भगत सिंह के लेख का जवाब हो सकती हैं. फिर भी कोई शंका हो तो आप अपने ईमेल आईडी से मुझसे वार्ता करें. हो सकता है आपकी शंकाएं दूर हो जाएँ.

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  4. भाई जीशान जी
    मुझे कोई शंका नहीं है क्यों कि मैं विज्ञानों के विज्ञान मार्क्सवाद का विद्यार्थी हूँ। फिर भी यह सम्पर्क बना रहेगा ऐसी आशा है।

    दृष्टिकोण

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