रविवार, 22 नवंबर 2009

आज के युग का विज्ञान

आज के युग का विज्ञान, वाह क्या कहने........अगर वैज्ञानिक महोदय खुद कहे कि मैं सारे इश्वरों में विश्वास रखता हूँ तो हो गया बंटाढार । दुनिया में विज्ञान का सबसे महत्वपूर्ण कार्य ईश्वर की माया से लड़ना है जिसने अनपढ़ आम जनसाधारण से लेकर बड़े-बड़े पढे़-लिखों को भी अपनी गिरफ्त में ले रखा है । अगर विज्ञान यह नहीं कर सकता तो इसका मतलब यह है कि विज्ञान गलत हाथों में चला गया है । दरअसल विज्ञान को गलत हॉथों द्वारा ही इस्तेमाल किया रहा है, जिसका नतीजा यह है कि विज्ञान को मात्र तकनीक तक सीमित कर दुनिया के सामने रख दिया गया है और इसके फिलासॉफिक पहलू को छिपाकर रखा जा रहा है। इससे दुनिया भर में विज्ञान के नाम पर एक ऐसे शास्त्र का चलन जोर पकड़ गया है जिसमें से वैज्ञानिक दृष्टिकोण गायब है । मशीन और टेक्नॉलॉजी के जाल में सारी दुनिया को उलझाकर पूंजीपति वर्ग अपनी तिजोरियाँ भरने में लगे हैं और दूसरी ओर तकनीक शिक्षा के नाम पर मात्र मैकेनिकों की फौज तैयार की जा रहीं है जो देश में दिमागी खोखलेपन के अलावा और भी कई सारी समस्याएँ खड़ी करती जा रही है । विज्ञान के फिलासॉफिकल पहलू का काम है कि प्रकृति विश्व- ब्रम्हाण्ड एवं मानव समाज के सत्यों का निरन्तर उद्घाटन करते रहना और मानव जीवन को इसकी जटिलताओं से मुक्ति दिला कर जीवन को उसकी ऊँचाइयों की ओर ले जाना ।

1 टिप्पणी:

  1. आपके सरोकार प्रभावित करते हैं।
    दृष्टिकोण भी।

    शुक्रिया।

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